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📖 भारशिव क्षत्रिय इतिहास ग्रन्थमाला 📖 भारत की वैदिक परम्परा CHAPTER 2 PART 7

 🌼 न्यू मार्तण्ड साप्ताहिक पत्रिका 🌼

भारशिव क्षत्रिय इतिहास ग्रन्थमाला


ग्रन्थ–1

अध्याय–2 (भाग–7)

भारशिव क्षत्रियों की गौरवशाली परंपरा

"जिस समाज की जड़ें अपने इतिहास में होती हैं, उसका भविष्य भी उतना ही मजबूत होता है।"

भारतीय इतिहास में भारशिव क्षत्रियों का नाम साहस, स्वाभिमान और धर्मरक्षा के साथ स्मरण किया जाता है। प्राचीन भारतीय परंपराओं तथा अनेक ऐतिहासिक अध्ययनों में भारशिव नाम एक ऐसे वीर क्षत्रिय समुदाय के रूप में मिलता है, जिसने कठिन समय में भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

भारशिवों की सबसे बड़ी विशेषता उनकी शिवभक्ति मानी जाती है। परंपरा के अनुसार वे भगवान शिव के प्रति गहरी आस्था रखते थे और धर्म, न्याय तथा लोककल्याण को अपने जीवन का आधार मानते थे। इसी कारण उनके नाम के साथ "भारशिव" की पहचान जुड़ी।

इतिहास का सबसे बड़ा संदेश यही है कि कोई भी समाज अपने पूर्वजों के आदर्शों को अपनाकर ही उन्नति करता है। इसलिए भारशिव क्षत्रियों का गौरव केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। नई पीढ़ी का दायित्व है कि वह अपने इतिहास, संस्कृति और ऋषि-परंपरा का अध्ययन करे तथा राष्ट्र और समाज की सेवा को अपना सर्वोच्च कर्तव्य माने।

(क्रमशः – भाग–8 में : भारशिव क्षत्रियों की शिवभक्ति, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय चेतना।)

॥ हर हर महादेव ॥

॥ ॐ नमः शिवाय ॥

लेखक

कैलाश नाथ राय भरतवंशी क्षत्रिय

राष्ट्रीय अध्यक्ष

राष्ट्रीय भारशिव क्षत्रिय महासंघ, भारत

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