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📰 न्यू मार्तण्ड साप्ताहिक पत्रिका ज्ञान का प्रकाश – समाज का विकास विशेष सम्पादकीय | महा जन-जागरण अभियान

 


📰 न्यू मार्तण्ड साप्ताहिक पत्रिका

ज्ञान का प्रकाश – समाज का विकास

विशेष सम्पादकीय | महा जन-जागरण अभियान

✊ जागो और जगाओ ✊

इतिहास हमारा – सम्मान हमारा – भविष्य हमारी आने वाली पीढ़ियों का

आइए, मिलकर भर-राजभर क्षत्रिय समाज के इतिहास, सम्मान और उज्ज्वल भविष्य के लिए जन-जागरण का अभियान चलाएँ।

इतिहास का दर्द और न्याय की पुकार : भर-राजभर क्षत्रिय समाज कब तक प्रतीक्षा करेगा?

एक महत्वपूर्ण प्रश्न

क्या भर-राजभर क्षत्रिय समाज को ऐतिहासिक अन्याय के आधार पर विशेष संवैधानिक संरक्षण, सम्मान अथवा स्वतंत्रता सेनानी समुदाय के रूप में मान्यता देने की मांग उठाई जानी चाहिए? इस विषय पर समाज की राय आमंत्रित है। कृपया इस सम्पादकीय को पढ़कर अपनी निष्पक्ष राय अवश्य दें।

लेखक : कैलाश नाथ राय भरतवंशी

राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय भारशिव क्षत्रिय महासंघ

संपादक, न्यू मार्तण्ड साप्ताहिक पत्रिका

इतिहास कभी-कभी इतना निर्दयी हो जाता है कि जो समाज कभी राजसत्ता, स्वाभिमान और वीरता का प्रतीक था, वही समाज कालांतर में उपेक्षा, गरीबी और विस्मृति का शिकार बन जाता है। भर-राजभर क्षत्रिय समाज की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।

यह वही समाज है, जिसके पूर्वजों ने इस धरती की रक्षा की, अपने गढ़ और दुर्ग बनाए, अपनी संस्कृति और स्वाभिमान के लिए संघर्ष किया। समय बदला, विदेशी आक्रमण हुए, सत्ता हाथ से निकल गई और धीरे-धीरे यह समाज सामाजिक एवं आर्थिक रूप से पीछे धकेल दिया गया।

औपनिवेशिक शासन के दौरान अनेक समुदायों को संदेह, दमन और कठोर प्रशासनिक नीतियों का सामना करना पड़ा। इन नीतियों के दुष्परिणाम केवल उस समय तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उनकी छाया पीढ़ियों तक पड़ी। जब किसी समाज की पहचान, सम्मान और अवसर छीन लिए जाते हैं, तब उसका दर्द सदियों तक जीवित रहता है।

आज प्रश्न यह नहीं है कि अतीत में क्या हुआ; प्रश्न यह है कि क्या इतिहास के घावों को समझने और न्याय की दिशा में आगे बढ़ने का साहस हमारे पास है?

क्या भर-राजभर क्षत्रिय समाज की पीड़ा पर राष्ट्रीय विमर्श नहीं होना चाहिए?

क्या इस समाज के इतिहास, संघर्ष और योगदान का गंभीर अध्ययन नहीं होना चाहिए?

क्या यह उचित नहीं होगा कि सरकार एक उच्चस्तरीय आयोग गठित करे, जो इस समाज के इतिहास, औपनिवेशिक काल की परिस्थितियों और वर्तमान सामाजिक-आर्थिक स्थिति का निष्पक्ष अध्ययन करे?

यदि किसी समाज ने ऐतिहासिक परिस्थितियों के कारण पीढ़ियों तक वंचना और पिछड़ापन सहा है, तो उसके पुनरुत्थान के लिए विशेष नीतियों पर विचार करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का दायित्व है।

यह किसी विशेषाधिकार की नहीं, बल्कि ऐतिहासिक न्याय की मांग है।

हमारी प्रमुख माँगें

● भर-राजभर क्षत्रिय समाज के इतिहास और योगदान पर राष्ट्रीय स्तर पर शोध कराया जाए।

● ऐतिहासिक एवं औपनिवेशिक प्रभावों के अध्ययन हेतु एक आयोग गठित किया जाए।

● समाज के शैक्षिक, आर्थिक और सामाजिक उत्थान के लिए विशेष योजनाएँ बनाई जाएँ।

● भर-राजभर क्षत्रिय समाज के महान शासकों, योद्धाओं और जननायकों को राष्ट्रीय इतिहास और पाठ्यक्रम में उचित स्थान दिया जाए।

● केंद्र और राज्य सरकारें इस समाज की परिस्थितियों पर विशेष ध्यान देते हुए उसके पुनरुत्थान के लिए ठोस नीतिगत पहल करें।

समाज से आह्वान

कोई भी समाज तभी उठता है जब वह अपने इतिहास को पहचानता है, अपने पूर्वजों के संघर्ष को समझता है और अपने अधिकारों के लिए संवैधानिक तथा लोकतांत्रिक तरीके से संगठित होकर आवाज उठाता है।

भर-राजभर क्षत्रिय समाज को भी अब शोध, संगठन, शिक्षा और जागरूकता के मार्ग पर आगे बढ़ना होगा। हमें अपने इतिहास के दस्तावेज़, प्रमाण और परम्पराओं को सुरक्षित करना होगा। हमें आने वाली पीढ़ियों को बताना होगा कि हम केवल एक जाति नहीं, बल्कि एक गौरवशाली ऐतिहासिक परम्परा के उत्तराधिकारी हैं।

इतिहास की अदालत में देर हो सकती है, लेकिन न्याय की माँग कभी समाप्त नहीं होती।

आज समय की पुकार है कि भर-राजभर क्षत्रिय समाज के इतिहास, उसके संघर्ष और उसके साथ हुए ऐतिहासिक अन्याय पर राष्ट्रीय स्तर पर विचार हो।

हम केंद्र और राज्य सरकारों से आग्रह करते हैं कि वे इस विषय पर गंभीरता से विचार करें और भर-राजभर क्षत्रिय समाज के सम्मान, शोध और समग्र उत्थान के लिए ठोस कदम उठाएँ।

जिस समाज ने अपना सब कुछ खो दिया, उसके दर्द को सुनना भी राष्ट्र का कर्तव्य है।

समाज से विनम्र निवेदन

क्या आप इस विचार से सहमत हैं कि भर-राजभर क्षत्रिय समाज के इतिहास, संघर्ष और उसके साथ हुए ऐतिहासिक अन्याय के आधार पर केंद्र एवं राज्य सरकारों को विशेष अध्ययन, आयोग गठन तथा विशेष संवैधानिक संरक्षण अथवा सम्मानजनक व्यवस्था पर विचार करना चाहिए?

अपनी बहुमूल्य राय अवश्य दें।

☐ हाँ  ☐ नहीं  ☐ अपने सुझाव लिखें।

हो सकता है कि इस प्रयास का पूरा लाभ हमें न मिले, किन्तु यदि आज हम अपने इतिहास, सम्मान और भविष्य के लिए आवाज उठाएँगे, शोध करेंगे, संगठित होंगे और समाज को जागृत करेंगे, तो आने वाली पीढ़ियों को इसका लाभ अवश्य मिल सकता है।

हर पीढ़ी का एक कर्तव्य होता है—वह अपने पूर्वजों के सम्मान की रक्षा करे और अपनी संतानों के लिए एक बेहतर भविष्य का मार्ग प्रशस्त करे। यदि हम आज मौन रहेंगे, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमसे पूछेंगी—जब इतिहास न्याय माँग रहा था, तब आप कहाँ थे?

🌺 महा जन-जागरण अभियान 🌺

जागो और जगाओ – इतिहास बचाओ, सम्मान दिलाओ

इस सम्पादकीय को प्रत्येक भर-राजभर क्षत्रिय परिवार तक पहुँचाइए।

हर गाँव, हर घर, हर युवा तक यह संदेश पहुँचाइए।

सरकार हमारी सुने, समाज को उसका सम्मान मिले और आने वाली पीढ़ियों को एक उज्ज्वल भविष्य मिले।

आइए, हम सब मिलकर अपने समाज के इतिहास, सम्मान और भविष्य के लिए जन-जागरण, शोध और सामाजिक एकता का संकल्प लें।

आपकी राय भविष्य की दिशा निर्धारित करने में महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकती है।

जय क्षत्रिय। जय भारशिव। जय राजभर। जय भारत।

— कैलाश नाथ राय भरतवंशी

राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय भारशिव क्षत्रिय महासंघ

संपादक, न्यू मार्तण्ड साप्ताहिक पत्रिका

📰 न्यू मार्तण्ड साप्ताहिक पत्रिका

"ज्ञान का प्रकाश – समाज का विकास"

🏛 राष्ट्रीय भारशिव क्षत्रिय महासंघ

"संगठित समाज – सशक्त समाज – सम्मानित समाज"

एक समाज • एक संकल्प • एक संघर्ष • एक लक्ष्य

महा जन-जागरण अभियान – हर घर तक, हर गाँव तक, हर युवा तक।

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