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भारशिव क्षत्रिय इतिहास ग्रन्थमाला CHAPTER 3 PART 21

 ​🌼 न्यू मार्तण्ड साप्ताहिक पत्रिका 🌼


भारशिव क्षत्रिय इतिहास ग्रन्थमाला

​ग्रन्थ: 1

​अध्याय: 3 (भाग–21)

​विषय: भारशिव नागों का भूगोल और राज्य विस्तार

​"किसी भी राजवंश की शक्ति का अनुमान उसके राज्य की सीमाओं, प्रशासनिक केंद्रों और सांस्कृतिक प्रभाव से लगाया जाता है।"

​भारशिव नागों का इतिहास केवल एक राजवंश का इतिहास नहीं, बल्कि उत्तर भारत में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक शक्ति के उदय का इतिहास है। उपलब्ध अभिलेखों, सिक्कों और पुरातात्त्विक साक्ष्यों से यह संकेत मिलता है कि भारशिव नागों का प्रभाव मध्य भारत से लेकर गंगा-यमुना क्षेत्र तक विस्तृत था।

​📍 प्रमुख शासन क्षेत्र:

​1. पद्मावती (वर्तमान पवाया, मध्य प्रदेश)

पद्मावती नाग शासकों की प्रमुख राजधानी मानी जाती है। यहाँ से प्राप्त प्रचुर मात्रा में सिक्के और पुरातात्त्विक अवशेष इस क्षेत्र पर नाग शासन की सुदृढ़ पुष्टि करते हैं।

​2. मथुरा

मथुरा प्राचीन काल से ही एक अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक और व्यापारिक केंद्र रहा है। अनेक इतिहासकारों का मत है कि नाग शासकों का प्रभाव इस क्षेत्र तक भी विस्तृत था।

​3. विदिशा और आसपास का क्षेत्र

मध्य भारत का यह क्षेत्र राजनीतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से हमेशा से धुरी रहा है। यहाँ भी नाग वंश की उपस्थिति और प्रभाव के स्पष्ट प्रमाण प्राप्त हुए हैं।

​4. गंगा-यमुना का दोआब

कुछ विद्वानों का मत है कि नागों का प्रभाव उत्तर भारत के विस्तृत भूभाग तक फैला हुआ था और उन्होंने तत्कालीन स्थानीय राजनीतिक संरचना को व्यापक रूप से प्रभावित किया था।

​🛡️ व्यापार, सामरिक और प्रशासनिक महत्व

​सामरिक स्थिति: भारशिव नागों के राज्य जिन क्षेत्रों में स्थापित थे, वे प्राचीन भारत के प्रमुख व्यापारिक मार्गों (Trade Routes) से जुड़े हुए थे।

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