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महागुरुओं का ऋण : मेरे जीवन की दिशा बदल देने वाला वह अविस्मरणीय दिन

Writing
न्यू मार्तण्ड साप्ताहिक पत्रिका
महागुरुओं का ऋण : मेरे जीवन की दिशा बदल देने वाला वह अविस्मरणीय दिन
(श्रृंखला – भाग 1)
जीवन में कुछ ऐसे क्षण आते हैं, जो केवल स्मृति बनकर नहीं रहते, बल्कि व्यक्ति के जीवन का मार्ग बदल देते हैं। मेरे जीवन में ऐसा ही एक अविस्मरणीय अवसर वर्ष 2014 के मई माह में आया। मैं जयपुर से अपने पैतृक निवास पर लौटा था। उसी दिन मेरे घर पर समाज के प्रख्यात चिंतक, शिक्षाविद् एवं मेरे पूज्य मार्गदर्शक आदरणीय श्री वंशराज मास्टर जी पधारे। उस दिन जो चर्चा हुई, उसने मेरे जीवन की दिशा, सोच और सामाजिक संकल्प—तीनों को बदल दिया।
समाज के इतिहास पर चर्चा करते-करते अचानक उनकी आँखें भर आईं। उनका गला रुंध गया। अत्यंत भावुक होकर उन्होंने कहा—
"हमारा समाज अत्यंत स्वाभिमानी रहा है। हमारे पूर्वजों का इतिहास गौरवपूर्ण रहा है, किंतु आज स्थिति ऐसी बन गई है कि बहुत से लोग अपने ही इतिहास और पहचान को बताने में संकोच करने लगे हैं। यह हमारे लिए अत्यंत पीड़ादायक है।"
उनकी आँखों से छलकते आँसू केवल एक व्यक्ति की वेदना नहीं थे, बल्कि पूरे समाज की उस पीड़ा का प्रतीक थे, जो अपने गौरवशाली अतीत को विस्मृति में जाते हुए देख रही थी।
इसी बीच आदरणीय वंशराज मास्टर जी ने समाज के वरिष्ठ अधिवक्ता, चिंतक एवं मेरे पूज्य मार्गदर्शक आदरणीय श्री लालजी राय एडवोकेट जी भारतवंशी को भी मेरे घर बुलवाया। दोनों महापुरुषों ने घंटों तक मुझे समाज के इतिहास, परंपराओं, संस्कृति, स्वाभिमान और सामाजिक चेतना के विषय में विस्तार से समझाया। उन्होंने केवल जानकारी नहीं दी, बल्कि मेरे भीतर समाज के लिए कुछ करने का संकल्प भी जागृत किया।
आज मैं पूरे आत्मविश्वास के साथ कह सकता हूँ कि यदि मेरे जीवन में इन दोनों महापुरुषों का सान्निध्य और मार्गदर्शन न मिला होता, तो शायद मैं भी समाज के लिए इस प्रकार कार्य करने का साहस नहीं जुटा पाता। मेरे लिए ये दोनों केवल गुरु नहीं, बल्कि महागुरु हैं। इन्होंने मुझे समाज की सेवा का मार्ग दिखाया, स्वयं पीछे रहकर मुझे आगे बढ़ाया और हर कठिन परिस्थिति में मेरा मनोबल बढ़ाया।
उन्होंने मुझे यह प्रेरणा दी कि किसी भी समाज की सबसे बड़ी शक्ति उसका इतिहास, उसकी संस्कृति और उसका आत्मसम्मान होता है। जो समाज अपने इतिहास को भूल जाता है, वह धीरे-धीरे अपने आत्मविश्वास और अस्तित्व को भी खो देता है। इसलिए प्रत्येक युवक और युवती का कर्तव्य है कि वह अपने समाज के इतिहास का अध्ययन करे, अपने पूर्वजों के त्याग और गौरव को जाने तथा आत्मगौरव के साथ जीवन जीए।
आज यदि मुझे राष्ट्रीय भारशिव क्षत्रिय महासंघ के माध्यम से समाज सेवा करने का अवसर प्राप्त हुआ है और मैं राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में समाज के बीच कार्य कर रहा हूँ, तो उसके मूल में मेरे इन दोनों महागुरुओं का अमूल्य मार्गदर्शन, उनका विश्वास और उनका आशीर्वाद है। उन्होंने मुझे सिखाया कि समाज की सेवा पद के लिए नहीं, बल्कि पीढ़ियों के भविष्य के लिए की जाती है।
मैं मानता हूँ कि समाज का वास्तविक इतिहास केवल पुस्तकों में नहीं मिलता, बल्कि उन तपस्वी व्यक्तित्वों के जीवन में मिलता है, जिन्होंने बिना किसी स्वार्थ के समाज को जागृत करने का कार्य किया। आदरणीय श्री वंशराज मास्टर जी और आदरणीय श्री लालजी राय एडवोकेट जी भारतवंशी ऐसे ही दो युगपुरुष हैं, जिनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
(क्रमशः — भाग 2 में पढ़िए : "समाज-जागरण का संकल्प और मेरे महागुरुओं का अद्भुत व्यक्तित्व")
✍️ कैलाश नाथ राय भरतवंशी
राष्ट्रीय अध्यक्ष
राष्ट्रीय भारशिव क्षत्रिय महासंघ

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