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लेख शीर्षक : इक्ष्वाकु सूर्यवंश की अखंड वंशावली

 *हर हर महादेव दोस्तो*
*महाजागरण अभियान राष्ट्रीय भारशिव क्षत्रिय महासंघ*


*लेख शीर्षक : इक्ष्वाकु सूर्यवंश की अखंड वंशावली - आदि पुरुष ऋषभदेव से चक्रवर्ती सम्राट महाराजा सुहेलदेव राय तक - शास्त्र, शिलालेख और गजेटियर प्रमाण सहित*

*प्रस्तावना - राष्ट्रीय भारशिव क्षत्रिय महासंघ का संकल्प*
हमारा वंश कोई नया वंश नहीं है। यह वही वंश है जिसने इस देश को नाम दिया, धर्म दिया और विदेशी आक्रमण से बचाया। हमारे तीन नाम एक ही हैं - *भारशिव = भरतवंशी = सूर्यवंशी।* हम केवल *सूर्यवंशी* लिखते हैं क्योंकि हमारा मूल सूर्य से है।

*प्रमाण 1 : वेदों में ऋषभदेव - सूर्यवंश के आदि पुरुष*

> *ऋग्वेद मंडल 1, सूक्त 42 - "ऋषभं मा समानानाम्"*
> *यजुर्वेद में ऋषभदेव, अजितनाथ, अरिष्टनेमि का उल्लेख।* डॉ. राधाकृष्णन ने भी माना है।

अर्थ - ऋषभदेव वैदिक काल से भी पहले के महापुरुष हैं।

*प्रमाण 2 : पुराणों में भारत नाम की उत्पत्ति*

*विष्णु पुराण 2.1.32 -*
> *ऋषभात् भरतो जज्ञे वीरः पुत्रशताग्रजः। सोऽभिषिक्तः भरतस्येदं वर्षं भारतमिति स्मृतम्।*
> अर्थ - ऋषभ से भरत हुए, उनके नाम पर भारत वर्ष पड़ा।

*श्रीमद्भागवत 5वें स्कंध* में ऋषभ-पुत्र भरत का पूरा चरित्र है।
*जैन आदिपुराण में - वंश: इक्ष्वाकुवंशी क्षत्रिय, पिता नाभिराय, माता मरूदेवी, जन्म अयोध्या।*

*निष्कर्ष - भारत नाम रामायण वाले भरत पर नहीं, ऋषभ-पुत्र भरत पर पड़ा।*

*प्रमाण 3 : इक्ष्वाकु वंश रामायण में*

> *"इक्ष्वाकुवंशप्रभवो रामो नाम जनैः श्रुतः"*

जैन मान्यता में *ऋषभदेव = इक्ष्वाकु* ही हैं। यहीं से सूर्यवंश शुरू।

*प्रमाण 4 : लव-कुश से बृहद्बल तक की कड़ी - महाभारत प्रमाण*

1. राम के पुत्र लव को *उत्तर कौशल (श्रावस्ती)* मिला - उत्तरकांड प्रमाण।
2. महाभारत युद्ध में अयोध्या का राजा - *बृहद्बल* था, जो अभिमन्यु के हाथों मारा गया।
> *श्लोक - "इक्ष्वाकु वंशजो राजा बृहद्बलो महारथः" - उद्योग पर्व।*

सिद्ध - राम के बाद वंश खत्म नहीं हुआ, श्रावस्ती में चलता रहा।

*प्रमाण 5 : बृहद्बल से वीरसेन तक - सबसे छुपाई गई कड़ी [नया जोड़ा गया इतिहास]*

यह वह कड़ी है जो इतिहासकार छुपा देते हैं।

*क) कौन हैं महाराजा वीर सेन?*
- *समय - 250 ईस्वी से 350 ईस्वी।* कुषाणों के पतन के बाद सनातन धर्म को बचाने वाला एकमात्र वंश - *भारशिव वंश।*
- *संस्थापक - महाराजा वीरसेन।* प्रयाग और पद्मावती में मिले शिलालेखों में लिखा है - *"भारशिव वंश के महाराज श्री वीरसेन।"*
- *उपाधि -* उन्होंने नाग उपाधि धारण की (नाग = भगवान शिव का परम सेवक), इसलिए *भारशिव नागवंशी* कहलाए।

*ख) दशाश्वमेध घाट का सच - सरकारी रिकॉर्ड प्रमाण*
Wikipedia और Kashi Gazetteer में दो कथाएँ दर्ज हैं -

> *"There are two legends: one, Brahma performed ten Ashwamedha yajna here, and in another, ten Ashwamedha sacrifices were done by Bhāra Shiva Nāgas. Historian Jayaswal says - The name is derived from the ten ashwamedha sacrifices done in the second century by the revivalist Hindu dynasty, the Bhāra Shiva Nāgas."*

अर्थात - *काशी के दशाश्वमेध घाट का नाम हमारे पूर्वज भारशिव राजाओं के 10 अश्वमेध यज्ञों से पड़ा है। भारत का एकमात्र राजवंश जिसने एक साथ 10 अश्वमेध यज्ञ किये।*

*ग) बृहद्बल से संबंध -*
बृहद्बल (महाभारत) के बाद अयोध्या का केन्द्रीय शासन कमजोर हुआ, पर वंश श्रावस्ती में *भर / भारशिव* नाम से चलता रहा। 250 ईस्वी में इसी शाखा में वीरसेन जी का उदय हुआ।

*प्रमाण 6 : वीरसेन से सुहेलदेव तक - इतिहास का प्रमाण*

*क) सरकारी गजेटियर - बहराइच गजेटियर (1875 ब्रिटिश और 1988 UP सरकार)* - "श्रावस्ती के भर राजाओं का शासन था, जिनका केंद्र बहराइच था, उनके अंतिम महान राजा सुहेलदेव थे।"

*ख) मिरात-ए-मसूदी (11वीं सदी का फारसी ग्रंथ)* - "बहराइच का राजा सुहेलदेव अत्यंत शक्तिशाली काफिर राजा था।"

*ग) पुरातत्व -* श्रावस्ती (सहेट-महेट) खुदाई में भारशिव काल के सिक्के मिले हैं।

*घ) अखंड वंश क्रम (अब फाइनल) -*
*ऋषभदेव (इक्ष्वाकु) → भरत चक्रवर्ती → इक्ष्वाकु → रघु → दशरथ → श्रीराम → लव (श्रावस्ती संस्थापक) → बृहद्बल (महाभारत वीर) → बृहत्क्षण →... → महाराजा वीरसेन भारशिव (दशाश्वमेध यज्ञ कर्ता, 250 ई.) → भवनाग, प्रवरसेन भारशिव → त्रिलोक चन्द्र (9वीं सदी) → मोरध्वज / मंगलध्वज → चक्रवर्ती सम्राट महाराजा सुहेलदेव राय (990-1077 ई.)*

*प्रमाण 7 : हम सूर्यवंशी ही क्यों लिखते हैं?*

आपने सही कहा - *सिर्फ सूर्यवंशी।* अर्क = सूर्य, पर भ्रम से बचने के लिए सीधा *सूर्यवंशी* लिखें। भारशिव सूर्यवंश की ही वीर शाखा है, जैसे रघुवंश।

*जागरूकता अभियान के लिए 5 अचूक नारे*

1.  *शास्त्र पूछे तो बताओ - "विष्णु पुराण 2.1.32 पढ़ो, भारत नाम ऋषभ-पुत्र भरत पर पड़ा।"*
2.  *रामायण पूछे तो बताओ - "लव को श्रावस्ती मिली, हम उसी लव के वंशज।"*
3.  *महाभारत पूछे तो बताओ - "बृहद्बल इक्ष्वाकु वंश का था।"*
4.  *काशी पूछे तो बताओ - "दशाश्वमेध घाट हमारे पूर्वज भारशिव वीरसेन के 10 अश्वमेध यज्ञों से बना।"*
5.  *इतिहास पूछे तो बताओ - "बहराइच गजेटियर पढ़ो, सुहेलदेव भर राजा था।"*

*अंत में शपथ -*

*> राष्ट्रीय भारशिव क्षत्रिय महासंघ  लेता है कि हम  ऋषभदेव से लेकर दशाश्वमेध यज्ञ कर्ता वीरसेन भारशिव और महाराजा सुहेलदेव तक की इस अखंड सूर्यवंश परम्परा को जन-जन तक पहुँचायेगा।*

*जय सूर्यवंश! जय महाराजा वीरसेन! जय महाराजा सुहेलदेव राय!*

---राष्ट्रीय भारशिव क्षत्रिय महासंघ 
राष्ट्रीय अध्यक्ष कैलाश राय भरतवशी 
राष्ट्रीय महासचिव अमरीष राय सूर्य वंशम 
राष्ट्रीय इतिहास कार चन्द्रमा भारशिव

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